स्कूलों में बढ़ते हुए पाठ्यक्रम सिर्फ बच्चों
के लिए ही नहीं बल्कि माता-पिता के लिए भी चुनौतियों से भरा हुआ है। समय के अभाव को
देखते हुए स्कूलों में शारीरिक गतिविधि के समय को कम करने की वकालत की जाती रही है।
कई जगहों पे अकादमिक विषयों के लिए शारीरिक गतिविधियों को अक्सर हाशिए पर रखा जा रहा
है। इससे तो यही प्रतीत होता है कि शारीरिक गतिविधि का बौद्धिक और शैक्षणिक मूल्य काफी
हद तक अनदेखा हो चूका है।
हाल के अध्ययनों ने शारीरिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से अनुभूति
(cognition) से जोड़ा है। एक मस्तिष्क-आधारित परिप्रेक्ष्य (brain based
perspective) स्कूल में शारीरिक गतिविधियों को न सिर्फ बनाए रखने बल्कि बढ़ाने की
वकालत करता है।
व्यायाम ऑक्सीजन के साथ मस्तिष्क को ईंधन देता
है, जिससे न्यूरोट्रोफिन (neurotrophins) को रिलीज़ होने में मदद मिलती है। ये मूड को
प्रभावित करता है, मेमोरी को मज़बूत करता है, और न्यूरॉन्स (neurons) के बीच संबंध बढ़ाता
है, तथा नए ब्रेन सेल्स (neurogenesis) के
उतपादन को बढ़ता है । नई मस्तिष्क कोशिकाएं बेहतर मनोदशा, स्मृति और सीखने को प्रबल करती है। वान प्रैग, क्रिस्टी, सेजनोव्स्की और गैज जैसे विद्वानों
का कहना है कि नियमित व्यायाम मस्तिष्क में नई कोशिकाओं को जन्म देता है और पहले से
मौजूद कोशिकाओं की आयु बढ़ता है।
अमेरिका के शहर इरविन के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय
में न्यूरोसाइंटिस्टस ने खोज किया के व्यायाम
(BDNF) को रिलीज़ करता है। ये वो प्राकृतिक पदार्थ है जो न्यूरॉनस को आपस में
संवाद करने की छमता को बढ़ाता है। जो अंततः अनुभूति (cognition) को बढ़ाता है (गरिएसबक,
हवड़ा , मोलटेनि, व और गोमेज़-पिनिला, 2004)। उन्हों ने बूढ़े हो रहे चूहों पे एक जांच की। उन्हें चल रहे पहिये पर रोजाना व्यायाम
कराया और पाया की हिप्पोकैम्पस समेत मष्तिष्क के विभिन्न छेत्रों में BDNF का स्तर
ऊपर उठ रहा है। याद रहे के हिप्पोकैम्पस स्मृति प्रसंस्करण (memory processing) के
लिए महत्वपूर्ण है।
वाशिंगटन के शहर सीएटल में तीसरी कक्षा के
बच्चों पर एक अध्ययन किया गया जहाँ बच्चे डांस के माध्यम से भाषा सिख रहे थे। इस डांस
में नियमित कताई, रेंगने, रोलिंग, हिलना, आगे पीछे होना, उछल कूद जैसे कई एरोबिक गतिविधि शामिल थे। जहाँ जिला स्तर
पे पढ़ने के स्कोर में 2 प्रतिशत की वार्षिक औसत गिरावट देखी गई थी, वही डांस गतिविधियों
में शामिल छात्रों ने छह महीनों में 13 प्रतिशत की वृद्धि का प्रदर्शन किया।
वैसे बचे जो स्पर्श, प्रेम भाव, या बातचीत
से वंचित रह जाते है वो हिंसक मानसिकता के हो सकते है। जो बच्चे सामान्य तौर तरीके
से आनंददायक गतिविधियों से आनंद लेने से वंचित रह जाते है, उनके अंदर अहिंसा की भावना
उत्पन होने की संभावना बढ़ जाती है, जो आगे चल कर असामाजिक तत्व बन सकते है।
नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल छात्रों के
सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक विकास
के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों ने स्कूलों में लागू करने के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं।
• रक्त के प्रसार तथा मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को बढ़ाने
के लिए अधिक से अधिक धीमी गति से बदन खींचने (stretching) और साँस लेने के व्यायाम का उपयोग करें।
• लगभग हर 20 मिनट पर एनर्जाइज़र (ऐसी गतिविधि जो ऊर्जा दे) शामिल
करें।
• सुनिश्चित करें कि आपकी कुछ गतिविधियों में अंतर्निर्मित शारीरिक
गतिविधि शामिल है (जैसे, किसी प्रोजेक्ट को करने के लिए बाहर जाना, जिग्सॉ पहेली पर
काम करना इत्यादि)।
• क्ले जैसी चीजों को पकड़ने, मोड़ने, तोड़ने इत्यादि जैसी शारीरिक
गतिविधयों का अवसर दिया जाना चाहिए।
• छात्रों को बिना आज्ञा लिए परमिशन हो के यो कभी भी क्लास में
खड़े हों, बदन को स्ट्रेच करे, अपनी मुद्राओं को बदल सकें, थोड़ा आगे पीछे हो लें, ताकि
वे अपने स्वयं के ऊर्जा स्तरों की निगरानी और प्रबंधन कर सकें।
• हर रोज़ हाथ की गतिविघियों की सुविधा हो, जैसे ताली बजाने के
खेल, नृत्य, पहेली, और चीज़ों का जोड़तोड़, इत्यादि।
एक सक्रिय शरीर एक सक्रिय मन को मज़बूत करता
है। जो शिक्षार्थी सक्रिय हैं वे अधिक सतर्क रहते हैं। थोड़ी सी स्ट्रेचिंग सेशन, थोड़ी
चहल क़दमी , या कुछ क्रॉस-लेटरल मूवमेंट्स, पढ़ने लिखने और सिखने में काफी लाभदायक साबित
होगा ।
आसिफ मोअज़्ज़म जामई
सचिव
हिमायत एजुकेशन फाउंडेशन